जगद्गुरु श्रीनिम्बार्काचार्यपीठाधीश्वर श्रीहरिव्यासदेवाचार्यजी महाराज कृत
सिद्धान्तरत्नाञ्जलि में “किञ्चायं सदाशिवो निर्गुणश्चेत्” - तात्पर्य और
सिद्धान्त का समन्वित विवेचन
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भारतीय वैदिक दार्शनिक परम्परा में किसी भी ग्रन्थ के तात्पर्य का निर्णय केवल
किसी एक पृथक् वाक्य के आधार पर नहीं किया जाता, अपितु सम्पूर्ण प्रकरण...
7 hours ago